हमारा उद्देश्य

संस्थान का प्राथमिक उद्देश्य प्रशिक्षकों को प्रशिक्षित करना था। वर्तमान में तकनीकी विकास के साथ ही तेज़ी से बदलते बाज़ार स्वरूप के कारण संस्थान की भूमिका भी बदल गई है। इसे ध्यान में रखते हुए संस्थान नो केवल प्रशिक्षण मुहैया करने के बजाए अपनी गतिविधियों के क्षेत्र का विस्तारित किया है। इसके अतर्गंत प्रशिक्षण के अलावा परामर्श, अनुसंधान, विस्तार तथा सूचना सेवाएँ संस्थान द्वारा प्रदान की जा रही है। इसके अतिरिक्त सूचना प्रौद्योगिकी के विकास ने भी संस्थान की कार्य सीमा को और अधिक विस्तार दिया है।

बडी उपलब्धियाँ

* दीर्घकालिक और डिप्लोमा कार्यक्रमों के आयोजन अभूतपूर्व में वृद्धि।
* सूचना प्रौद्योगिकी के नए पहलुओं का स्वीकार ।
* सम्मेलनों, संगोष्ठियों आदि के माध्यम से समसामयिक मुद्दों का विश्लेषण।
* आवश्यकता के अनुरूप कार्यक्रमों के संचालन को प्राथमिकता।
* ग्राहकों की आवश्यकता पर आधारित कार्यपद्धति और अभिनव हस्तक्षेप।
* कार्यक्रमों का मूल्यांकन।
* अनुसंधान आधारित सामग्री का प्रकाशन कार्य।

उच्चतम विशिष्टता

राष्ट्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम संस्थान (निम्समे) ने उद्यमों के विकास में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर बडे पैमाने पर अहम योगदान दिया है। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के साथ ही विश्वभर में विभिन्न स्तर के अधिकारी संस्थान द्वारा समकालीन विषयों पर आयोजित कार्यक्रमों, कार्यशालाओं तथा संगोष्ठियों से लाभान्वित हुए हैं।

संस्थान की ओर से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के विकास में योगदान की गतिविधियों में कुछ विशेष कार्यक्रमों का संचालन किया गया। इनमें खास तौर पर संयुक्त राष्ट्र औद्योगिक विकास संगठन (यूनिडो) की सहायता से पहली बार अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रम (1967); लघु उद्योगों के प्रबंधन के लिए अनुकूल प्रयास (सिमसिम) (1987); यूनेस्को चेयर (1997), लघु और मध्यम उद्यमों के संवर्धन पर अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला (1998); एक्सपोर्ट प्रमोशन विलेज (1999); महिलाओं के लिए व्यापार संबंधी विकास कार्यक्रम (ट्रेड) (2000); न्यू मिलेनियम (2001) में उद्यमिता विकास; आईएलओ द्वारा बाल श्रम उन्मूलन परियोजना के अंतर्गत आय सृजन कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम में बाल श्रमिकों की माताओं का प्रशिक्षण (2001); युगांडा, नामीबिया, दक्षिण अफ्रीका, भूटान, नाइजीरिया, सूडान, घाना के साथ क्रेता से क्रेता (बी2बी) लेन-देन राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तरों पर मिली सराहना का परिचायक है।

राष्ट्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम संस्थान (निम्समे) ने अपनी उत्कृष्टता और प्रतिबद्धता के आधार पर अपनी एक अलग पहचान बनायी है, जो कि आधुनिक दौर की उन्नत तकनीकों और विश्वस्तरीय सुविधाओं के साथ पारम्परिक प्रणाली का सबसे बेहतर सम्मिश्रण है। इतनी ही नहीं, यह लम्बी परिपाटी पर आधारित कार्यप्रणाली की निरंतर खोज और आविष्कार कर रहा है। राष्ट्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम संस्थान एक मात्र समाधान प्रदाता ही नहीं है, बल्कि मूल्यवर्धन साझेदार के रूप में भी उभर रहा है।

राष्ट्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम संस्थान परिसर में अंतर्राष्ट्रीय स्तर की बुनियादी संरचनाएँ और सुविधाएँ उपलब्ध हैं, जो संस्थान की स्वाभाविक उत्कृष्टता की परिचायक हैं। इन्हीं संरचनाओं और सुविधाओं के कारण संस्थान को अपनी सभी गतिविधियों में विशिष्टता और योग्यता बनाए रखना संभव होता है। संस्थान की सभी गतिविधियों में तकनीकी शामिल होने से समय के साथ तालमेल बनाए रखना और अपनी सेवाओं को अधिक कुशल बनाना संभव हो रहा है। अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त सुखद वातावरण, आधुनिक शैक्षणिक बुनियादी ढांचे, अनुभवी सदस्य संकायों, विशेषज्ञ सलाहकारों और विषय विशेषज्ञों के मार्गदर्शन से परिपूर्ण पद्धति के अलावा आधुनिक एवं रचनात्मक दृष्टिकोण से परिपूर्ण दशकों के अनुभव ने संस्थान द्वारा मुहैया की जा रही सेवाओं को एक नई परिभाषा दी है। अब इसने सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षण, अनुसंधान और विस्तार सुविधाओं के बल पर विश्वभर में स्वीकृति हासिल की है।

बीते वर्षों के दौरान संस्थान ने उद्यमिता विकास, प्रौद्योगिकी, प्रबंधन, विस्तार और सूचना सेवाओं के क्षेत्र में गहरा अनुभव और विशेषज्ञता हासिल की है। अपने उच्च गुणवत्तापूर्ण बुनियादी ढांचे के साथ नवाचार की अंतर्निहित क्षमता ने संस्थान को सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के संवर्धन के लिए उत्कृष्टता हासिल करने में सक्षम बनाया है। अपनी स्थापना से लेकर राष्ट्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम संस्थान (निम्समे) लघु और मध्यम उद्योगों के संवर्धन में सहायता कर रहा है। इतना ही नहीं, संस्थान द्वारा उद्योगों के अतिरिक्त संबंधित विकास एजेंसियों को भी अनुसंधान, सूचना, प्रशिक्षण और विस्तार के साथ परामर्श जैसी सेवाएँ प्रदान की गई है, जिससे यह अग्रणी बन गया है।

मौजूदा दौर की ज्ञान आधारित और अस्थिर अर्थव्यवस्था सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के सामने अहम चुनौतियां खड़ी कर रही हैं। इसके अलावा कड़ी प्रतिस्पर्धा की स्थिति के बीच वैश्वीकरण भी सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के अस्तित्व पर एक प्रमुख खतरे के रूप में में मंडरा रहा है। राष्ट्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम लगातार बदलती नीतियों और आर्थिक स्थितियों के साथ विशेष आवश्यकता आधारित कार्यक्रमों, कार्यशालाओं और संगोष्ठियों का आयोजन कर रहा है। इन गतिविधियों का संचालन मुख्य रूप से उद्योग तथा सहायक प्रणालियों को केंद्र में रखकर किया गया है। इनका उद्देश्य सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को उन पहलुओं का सामना करने में सक्षम बनाना है, जो प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से उद्यम की सफलता को प्रभावित करते हैं।

वैश्वीकरण के मौजूदा दौर में राष्ट्रीय, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों से संबंधित कार्यक्रमों की रूपरेखा सार्वभौमिक प्रासंगिकता के अनुसार बनाई गई है। इन विशेष कार्यक्रमों के माध्यम से संस्थान उद्यमियों को चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना करने के बारे में प्रशिक्षित कर रहा है; उन्हें प्रतियोगिता के बीच बने रहने में मदद कर रहा है, उन्हें वैश्विक परिदृश्य में आवश्यक प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त हासिल करने में सक्षम बना रहा है। निम्समे ने अपनी विशेषज्ञता तथा सेवाओं का विस्तार अन्य विकासशील और विकसित राष्ट्रों तक करते हुए सभी तरह की भौगोलिक बाधाओं को तोड़ दिया है।

राष्ट्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम संस्थान (निम्समे) तकनीकी सहयोग के लिए राष्ट्रमंडल कोष (सीएफटीसी), संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को), संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी), फोर्ड फाउंडेशन, जर्मनी के जीटीजेड, यूनाइटेड स्टेट्स एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट (यूएसएआईडी) और इंटरनेशनल लेबर ऑर्गनाइजेशन (आईएलओ) जैसी संस्थाओं तथा संगठनों के साथ जैसी कई अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ लाभपूर्ण गतिविधियों में जुडा हुआ है।